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Business News: RBI ने बढ़ाया रेपो रेट, SDF रेट 5.25 फीसदी और MSF-बैंक रेट 5.75 फीसदी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | RBI MPC ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की, SDF रेट 5.25 फीसदी और MSF-बैंक रेट 5.75 फीसदी पर बरकरार।

मुंबई, 7 अक्टूबर आलम की खबर: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने लगातार बदलते आर्थिक हालात के बीच नीतिगत दरों में बदलाव का फैसला किया है। 5 से 7 अक्टूबर तक चली MPC बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया गया। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति का रुख भी बदलते हुए ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती का संकेत दिया है।

इस फैसले का असर बैंकिंग व्यवस्था और आने वाले समय में कर्ज की ब्याज दरों पर पड़ सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर अलग-अलग बैंकों और वित्तीय संस्थानों की दरों पर उनके अपने फैसलों के आधार पर दिखाई देगा।

रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी

RBI MPC ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत यानी 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी को मंजूरी दी। इसके बाद रेपो रेट 5.25 फीसदी से बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया।

मौद्रिक नीति समिति का यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया। केंद्रीय बैंक के इस कदम का मुख्य आधार महंगाई और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े बदलते संकेतों को माना जा रहा है।

SDF रेट 5.25 फीसदी, MSF और बैंक रेट में बदलाव नहीं

रेपो रेट के साथ RBI ने दूसरी प्रमुख दरों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी यानी SDF रेट को 5.25 फीसदी कर दिया गया है।

वहीं, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानी MSF रेट और बैंक रेट को 5.75 फीसदी पर बरकरार रखा गया है। इन दरों का सीधा संबंध बैंकिंग सिस्टम में अल्पकालिक तरलता और ब्याज दरों के संचालन से है।

मौद्रिक नीति का रुख बदला

इस बैठक की सबसे अहम बात केवल रेपो रेट में बदलाव नहीं है। RBI ने अपनी मौद्रिक नीति के रुख को भी बदल दिया है। पहले केंद्रीय बैंक का रुख न्यूट्रल था, जिसे अब ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती किया गया है।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम है। आगे दरों में बढ़ोतरी होगी या उन्हें मौजूदा स्तर पर रखा जाएगा, यह आर्थिक वृद्धि और महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगा।

GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी

केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए वास्तविक GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 फीसदी रखा है। तिमाही आधार पर दूसरी तिमाही में 7.2 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.9 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.8 फीसदी की वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।

इससे संकेत मिलता है कि RBI को भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत वृद्धि की उम्मीद बनी हुई है। हालांकि, महंगाई का दबाव आर्थिक नीति के लिए अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती बना हुआ है।

महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी

RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए खुदरा महंगाई का अनुमान बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। दूसरी तिमाही में महंगाई 4.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6 फीसदी और चौथी तिमाही में 5.7 फीसदी रहने का अनुमान है।

कोर महंगाई के अनुमान को भी 4.3 फीसदी से बढ़ाकर 4.4 फीसदी किया गया है। गवर्नर के अनुसार, आने वाली तीन तिमाहियों में औसत महंगाई करीब 5.8 फीसदी रह सकती है।

फूड और फ्यूल कीमतों का असर

RBI के मुताबिक हाल के महीनों में खाद्य और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर महंगाई पर पड़ा है। यही वजह है कि महंगाई के अनुमान में बदलाव किया गया है।

केंद्रीय बैंक के सामने अब आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने और महंगाई को नियंत्रण में रखने के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती है।

बैंकिंग सेक्टर को लेकर RBI का भरोसा

RBI गवर्नर ने बैंकिंग सेक्टर की स्थिति को मजबूत बताया। उनके अनुसार, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी और नकदी उपलब्ध है। बैंकों की एसेट क्वालिटी और मुनाफे की स्थिति भी बेहतर बनी हुई है।

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानी NBFC की वित्तीय स्थिति को भी मजबूत बताया गया है। इससे वित्तीय प्रणाली की स्थिरता को लेकर केंद्रीय बैंक का भरोसा दिखाई देता है।

व्यापार घाटे पर भी नजर

मौद्रिक नीति के दौरान चालू खाते के घाटे यानी CAD की स्थिति पर भी चर्चा हुई। RBI के अनुसार पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा सीमित रहा और यह अर्थव्यवस्था की सहज रूप से संभाल सकने वाली सीमा से काफी नीचे था।

हालांकि जुलाई में चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ा। मजबूत सर्विसेज ट्रेड सरप्लस और विदेश से आने वाली रकम से समर्थन मिलने के बावजूद ऊंचे मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट का असर दिखाई दिया।

जुलाई और अगस्त में मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट 58.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 55.1 अरब डॉलर था।

अकाउंट एग्रीगेटर को लेकर नई सुविधा

RBI ने अकाउंट एग्रीगेटर व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण घोषणा की है। अब NBFC अकाउंट एग्रीगेटरों के बीच आपस में जुड़कर काम करने की सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।

इसका उद्देश्य अलग-अलग अकाउंट एग्रीगेटरों के बीच बेहतर तालमेल और डेटा आधारित वित्तीय सेवाओं को अधिक सुगम बनाना है। इससे वित्तीय जानकारी के इस्तेमाल और संबंधित सेवाओं की प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर RBI के ताजा फैसले से यह संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल महंगाई के जोखिम को गंभीरता से देख रहा है। रेपो रेट में बढ़ोतरी और मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव के बाद आने वाले महीनों में महंगाई, GDP और वित्तीय बाजारों के आंकड़े नीति की अगली दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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